भरत अध्यक्ष, अरुण महामंत्री निर्वाचित : छात्र-संघ चुनाव, गाँधी महाविद्यालय, उरई


गाँधी महाविद्यालय, उरई में छात्र-संघ चुनाव 2012-13 आज दिनांक 18 अक्टूबर 2012 को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए. प्रातः 8 बजे से मतदान आरम्भ हुआ जो अपराह्न 1 बजे तक चला. महाविद्यालय के पंजीकृत 1765 विद्यार्थियों में से कुल 809 ने मतदान किया. इसके पश्चात दोपहर बाद 2 बजे से मतगणना प्रारंभ हुई. इसमें अध्यक्ष और महामंत्री पद के उम्मीदवारों का निर्वाचन हुआ. 

अध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशी थे और महामंत्री पद पर तीन उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे. अध्यक्ष पद पर भरत कुमार राजपूत विजयी हुए. उन्हों ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिवरतन को 316 मतों से पराजित किया. भरत कुमार राजपूत को 517 मत प्राप्त हुए तथा शिवरतन को 201 मत प्राप्त हुए. शेष दो उम्मीदवारों में मनोज कुमार अग्रवाल और हृदेश कुमार राजपूत को क्रमशः 78 तथा 1 मत प्राप्त हुए. अध्यक्ष पद हेतु निरस्त किये गए मतों की संख्या 12 रही.

महामंत्री पद पर अरुण कुमार गौतम ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पुष्पेन्द्र सिंह कुशवाहा को 85 मतों से पराजित किया. अरुण कुमार गौतम को 410 मत प्राप्त हुए जबकि पुष्पेन्द्र सिंह कुशवाहा को 325 मत प्राप्त हुए. एक अन्य प्रत्याशी कपिल देव सेन को 41 मत मिले तथा निरस्त किये गए मतों की संख्या 33 रही.

विजयी उम्मीदवारों को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो ओ० पी० शर्मा द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान करने के साथ-साथ शपथ भी दिलवाई गई. चुनाव अधिकारी डॉ राकेश नारायण द्विवेदी ने चुनाव प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया.

अध्यक्ष तथा महामंत्री पद के लिए चक्रवार मतगणना निम्न प्रकार रही...


अध्यक्ष पद हेतु

क्र०
स०
प्रत्याशी का नाम
पहला  चक्र
दूसरा  चक्र
तीसरा  चक्र
चौथा  चक्र
पांचवां चक्र
छटवां चक्र
सातवाँ चक्र
आठवां चक्र
योग
1
भरत कुमार राजपूत
69
69
68
59
63
57
64
68
517
2
मनोज कुमार अग्रवाल
03
18
03
14
16
10
12
02
78
3
शिवरतन
26
12
29
25
20
32
23
34
201
4
हृदेश कुमार राजपूत
00
00
00
00
00
01
00
00
01
5
निरस्त
02
01
00
02
01
00
01
05
12



महामन्त्री पद हेतु

क्र०
स०
प्रत्याशी का नाम
पहला  चक्र
दूसरा  चक्र
तीसरा  चक्र
चौथा  चक्र
पांचवां चक्र
छटवां चक्र
सातवाँ चक्र
आठवां चक्र
योग
1
अरुण कुमार गौतम
53
56
54
49
50
52
47
49
410
2
कपिलदेव सेन
07
03
05
07
05
01
07
06
41
3
पुष्पेन्द्र सिंह कुशवाहा
33
36
36
35
44
44
45
52
325
4
निरस्त
07
05
05
09
01
03
01
02
33

गाँधी महाविद्यालय छात्र-संघ निर्वाचन : आठ प्रत्याशी मैदान में

छात्र संघ निर्वाचन २०१२ हेतु जारी अधिसूचना के बाद आज दिनांक ११.१०.२०१२ को गाँधी महाविद्यालय, उरई (जालौन) में नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हुई. नामांकन तय कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः १० बजे से होना शुरू हुआ. नामांकन समाप्ति पर कुल आठ प्रत्याशियों द्वारा परचा दाखिल किये गए. जिनमे ५ अध्यक्ष पद हेतु और ३ महामंत्री पद हेतु. 
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नामांकन की जाँच के बाद सभी आठों पर्चे वैध पाए गए. नाम वापसी की तय समय-सीमा में किसी भी प्रत्याशी द्वारा अपना नाम वापस नहीं लिया गया. इसके चलते अंतिम सूची में निम्न प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नामांकन अधिकारी डॉ शिवकुमार सिंह पटेल के द्वारा की गई.
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अध्यक्ष पद हेतु –
1-   आनंद यादव पुत्र श्री ब्रजकिशोर यादव, बी०ए० प्रथम वर्ष
2-   भरत कुमार पुत्र श्री धूराम सिंह राजपूत, एम०ए० उत्तरार्द्ध (प्रतिरक्षा अध्ययन)
3-   मनोज कुमार अग्रवाल पुत्र श्री ओमप्रकाश अग्रवाल, एम०ए० उत्तरार्द्ध (शिक्षाशास्त्र)
4-   शिवरतन वर्मा पुत्र श्री फूलचंद वर्मा, एम०ए० पूर्वार्द्ध (भूगोल)
5-   हृदेश राजपूत पुत्र श्री फूल सिंह राजपूत, एम०ए० उत्तरार्द्ध (भूगोल)
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महामंत्री पद हेतु –
1-   अरुण कुमार गौतम पुत्र श्री रमेश चन्द्र गौतम, एम०ए० पूर्वार्द्ध (प्रतिरक्षा अध्ययन)
2-   कपिल देव सेन पुत्र श्री हरि बाबू, एम०ए० पूर्वार्द्ध (प्रतिरक्षा अध्ययन)
3-   पुष्पेन्द्र सिंह कुशवाहा पुत्र श्री नाथूराम कुशवाहा, एम०ए० उत्तरार्द्ध (शिक्षाशास्त्र)
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नामांकन प्रक्रिया के देवेन्द्र नाथ और डॉ कुमारेन्द्र सिंह सेंगर द्वारा सहयोग किया गया.
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मतदान १८ अक्टूबर २०१२ को प्रातः ८ बजे से १ बजे तक होगा. अंतिम परिणाम की घोषणा, प्रमाण-पत्र वितरण और शपथ ग्रहण उसी दिन अंतिम मतगणना के बाद की जाएगी.

हिन्दी साहित्य परिषद्, गाँधी महाविद्यालय, उरई द्वारा विचार-गोष्ठी का आयोजन

                गांधी महाविद्यालय, उरई के हिन्दी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा वर्तमान शैक्षिक सत्र 2012-13 के लिए हिन्दी साहित्य परिषद् का गठन किया गया। परिषद् के तत्वावधान में 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस पर एक विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार एवं अनुवादक डॉ0 रामशंकर द्विवेदी उपस्थित रहे। 

                गोष्ठी का आरम्भ मुख्य अतिथि एवं मंचासीन प्राध्यापकों द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। तदुपरांत छात्राओं ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। 

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ0 रामशंकर द्विवेदी ने अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि हिन्दी भाषी क्षेत्रों विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की स्थिति यह है कि यहां पर लोग साहित्य पढ़ना ही नहीं चाहते हैं। इसके उलट बंगाल में माता-पिता अपने बच्चों में साहित्य पढ़ने के प्रति रुचि पैदा करते हैं। वहां साहित्य का अध्ययन एक प्रकार से अनिवार्य ही है। यही कारण है कि हिन्दीभाषी क्षेत्रों में हिन्दी के प्रति, हिन्दी साहित्य के प्रति लोगों में रुचि देखने को नहीं मिलती है।

                अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ0 अलका नायक का कहना था कि हिन्दी का विकास तो हो रहा है किन्तु हम स्वयं ही उसके विकास में अवरोधक का काम कर रहे हैं। हिन्दी की बात यहां एक दिन तो करते हैं उसके बाद हम फिर अंग्रेजी के मोह में फंस जाते हैं। अंग्रेजी का ज्ञान आवश्यक हो सकता है किन्तु उसके लिए अपनी भाषा को भुला देना सही नहीं है। 

                भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो0 देवेन्द्र नाथ ने कहा कि स्वतन्त्रता के पूर्व हिन्दी को राजभाषा, राष्ट्रभाषा बनाने की प्रतिबद्धता लोगों में दिखाई देती थी वह स्वतन्त्रता के बाद समाप्त हो गई। आजादी के पूर्व अहिन्दीभाषियों ने ही हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने पर व्यापक जोर दिया था। इसमें रवीन्द्रनाथ ठाकुर, सुभाषचन्द्र बोस आदि का नाम आसानी से लिया जा सकता है।

                हिन्दी विभाग के डॉ0 राकेश नारायण द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान में हिन्दी को लेकर वाह और आह की स्थिति दिख रही है। इसके द्वारा एक वर्ग वह है जो हिन्दी की जैसी स्थिति है उसी में खुश है और उसको स्थापित करने के लिए कोई कार्य नहीं कर रहा है। इसी तरह से एक वर्ग वह है जो हिन्दी के विकास को लेकर उत्साहित है और उसके विकास के लिए निरन्तर कार्य कर रहा है। हम सभी को मुख्य रूप से भाषाई विकास पर जोर देना चाहिए क्योंकि आज हिन्दी को अंग्रेजी से विरोध का सामना उतना नहीं करना पड़ रहा है जितना कि उसे अन्य भारतीय भाषाओं से करना पड़ रहा है।

                बी0एड0 विभाग के प्रवक्ता स्वप्निल भट्ट का कहना था कि हिन्दी इस देश की महारानी है और उसे राजनीतिज्ञों ने अपने वोट बैंक के लालच में नौकरानी की तरह बना दिया है। हमें स्वविकास के लिए हिन्दी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। रक्षा अध्ययन विभाग के प्रवक्ता डॉ0 अरुण कुमार का कहना था कि हिन्दी का विकास आवश्यक है पर उसके साथ ही विश्व बाजार में आने के लिए हमें दूसरी भाषाओं का ज्ञान भी होना चाहिए। इस कारण से हम भले ही अंग्रेजी अथवा कोई भी दूसरी भाषा को सीखें किन्तु अपनी राष्ट्रभाषा को भुलाने का कार्य न करें।

                गोष्ठी के अन्त में प्राचार्य प्रो0 ओ0 पी0 शर्मा ने सभी को आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी का विकास आज जिस तरह से हो रहा है वह बाजार की मांग है, इस दृष्टि से हमें हिन्दी को बाजार की भाषा बनने से रोकना होगा। हिन्दी का विकास हो इसके लिए उसे जन-जन की भाषा बनाया जाना चाहिए।

                गोष्ठी का संचालन परिषद् संयोजक डॉ0 बृजेश पाण्डेय ने किया। उक्त वक्ताओं के अलावा परिषद् के सदस्यों ने तथा अन्य प्राध्यापकों डॉ0 सुनीता गुप्ता, डॉ0 ऋचा पटैरिया, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, डॉ0 गोविन्द सुमन ने भी सम्बोधित किया।

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी की पहली ई-बुक का विमोचन



            दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो0 सत् चित् आनन्द द्वारा लिखित ई-बुक का विमोचन आज 6 सितम्बर 2012 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी के कुलपति प्रो0 एस0वी0एस0 राणा के करकमलों से हुआ। यह बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी की पहली ई-बुक है। ‘प्रिसिंपल ऑफ एजूकेशन’ नामक इस ई-बुक में प्रो0 सत् चित् आनन्द द्वारा बी0ए0 प्रथम वर्ष के प्रथम प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम को समाहित किया गया है। विश्वविद्यालय कैम्पस में एक सादा समारोह में विमोचन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रो0 आनन्द के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि आज के तकनीकी भरे दौर में इस तरह के कदमों की आवश्यकता है। इससे न केवल विद्यार्थियों को लाभ होगा वरन् विश्वविद्यालय तथा सम्बन्धित महाविद्यालय की गरिमा भी बढ़ती है। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से सम्बन्धित इस पहली ई-बुक के आने से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट का पुस्तकालय भी समृद्ध होगा। आने वाले दिनों में यदि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक अपने-अपने विषय से सम्बन्धित पाठ्यक्रम के आधार पर ई-बुक का निर्माण करें तो इससे विद्यार्थियों के समक्ष पाठ्यक्रम से सम्बन्धित अध्ययन सामग्री का अभाव नहीं रह जायेगा।

            बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी की पहली ई-बुक के लेखक प्रो0 सत् सित् आनन्द ने बी0ए0 प्रथम वर्ष के प्रथम प्रश्नपत्र पर आधारित अपनी इस पुस्तक के बारे में विस्तार से कुलपति और सभाकक्ष में उपस्थित समस्त लोगों को समझाया। प्रो0 आनन्द ने कुलपति महोदय को इस जानकारी से भी अवगत करवाया कि बी0ए0 प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष के समस्त प्रश्नपत्रों के पाठ्यक्रम को ई-बुक के रूप में लाने का कार्य चल रहा है और शीघ्र ही ये समस्त ई-बुक विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु उपलब्ध होंगी।




            बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ0 अरुण कुमार श्रीवास्तव ने प्रो0 आनन्द की जागरूकता की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने हमेशा छात्रहित के कार्य किये हैं और इस ई-बुक के निर्माण से भी छात्रों को लाभ पहुंचेगा। इसी के साथ डॉ0 श्रीवास्तव ने कुलपति महोदय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा विश्वविद्यालय की पहली ई-बुक का विमोचन किये जाने से अन्य जागरूक और सक्रिय प्राध्यापकों में भी उत्साह का संचार होगा और इसका लाभ समृद्ध पुस्तकालय के रूप में हमारे सामने आयेगा।
            उ0प्र0 राजनीतिविज्ञान परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे तकनीकी भरे कार्य सदैव से प्रो0 आनन्द के करकमलों से होते रहे हैं। आज इस ई-बुक के रूप में बुन्देलखण्ड के शैक्षिक वातावरण के लिए एक मील का पत्थर रखा गया है। आने वाले दिनों में प्रो0 आनन्द के इस कार्य से प्रोत्साहन लेकर अन्य प्राध्यापक भी बुन्देलखण्ड के शैक्षिक वातावरण को उन्नत करने में अपना योगदान देंगे।
            गांधी महाविद्यालय, उरई के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ0 ओ0 पी0 शर्मा ने कहा कि आज का दिन समूचे बुन्देलखण्ड के लिए गौरव का दिन है और व्यक्तिगत रूप से हमारे लिए इसलिए भी गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि विश्वविद्यालय की पहली ई-बुक उनके अपने विषय में आई है। कुलपति जी के सकारात्मक रवैये से आने वाले दिनों में अन्य विषयों में भी ई-बुक की रचना की जायेगी।
            ई-बुक के विमोचन समारोह में उक्त लोगों के अतिरिक्त प्रो0 सत् चित् आनन्द की धर्मपत्नी श्रीमती सुमन आनन्द, डी0वी0 कॉलेज, उरई की संगीत विभागाध्यक्ष डॉ0 वीणा श्रीवास्तव, बूटा महामंत्री डॉ0 टी0 के0 शर्मा, विश्वविद्यालय कैम्पस, समाज अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ0 नईम बॉबी, स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ0 राजीव कुमार, पी-एच0डी0 होल्डर्स एसोसिएशन के संयोजक डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर सहित कई अन्य प्राध्यापक तथा विश्वविद्यालय कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे।

बाल नाट्य कार्यशाला का समापन कार्यक्रम



          उरई इप्टा इकाई की ओर से प्रसिद्ध रंगकर्मी स्व0 बलराज साहनी की स्मृति में गांधी इंटर कॉलेज के पंत हॉल में पन्द्रह दिवसीय बाल नाट्य कार्यशाला का आयोजन 1 मई से किया गया। इस कार्यशाला के समापन दिवस-15 मई-को बच्चों द्वारा विविध कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। इस अवसर पर बच्चों द्वारा ‘चिड़िया’ नाटक को प्रस्तुत किया गया। इसमें बच्चों के द्वारा चिड़िया, कोयल, टिटहरी, कौआ, तोता, चूहा आदि का अभिनय किया गया। इसमें विशेष और प्रशंसनीय बात तो यह रही कि इन बच्चों ने जानवरों की आवाज को हू-ब-हू निकाल कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।


         

इस नाटक के द्वारा बच्चों ने दिखाया कि कैसे इंसान स्वार्थ की खातिर पशु-पक्षियों के निवास-स्थान को, उनके खाने-पीने के संसाधनों को नष्ट करता जा रहा है। स्वच्छन्द रूप से गाते-गुनगुनाते पक्षियों पर उस समय खाने-पीने का संकट आ जाता है जबकि शहर से आये कुछ लोगों द्वारा गांव के तालाब को मिट्टी डालकर मिटा दिया जाता है और बाग-बगीचों को भी काटा जाने लगता है। ऐसे में सभी पशु-पक्षी मिलकर अपने तालाब को और बाग को बचाते हैं।

          



बच्चों ने इस नाट्य-प्रस्तुति के द्वारा संदेश दिया कि हम स्वार्थ में जानवरों के लिए संकट पैदा न करें। उनको भी रहने, खाने-पीने का अधिकार है। पर्यावरण-संरक्षण का संदेश देती इस बाल-प्रस्तुति पर उपस्थित सभी प्रबुद्धजनों ने बच्चों का भरपूर उत्साहवर्द्धन किया। इस नाटक के अतिरिक्त बच्चों ने बुन्देली लोकगीतों की मधुर प्रस्तुति से भी दर्शकों का मन मोह लिया।



        



  कार्यशाला के समापन पर इप्टा उरई के वरिष्ठ सदस्य डॉ0 सतीशचन्द्र शर्मा ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशाला से बच्चों के अंदर छिपी हुई प्रतिभा का विकास होता है। प्रत्येक बच्चे में किसी न किसी तरह की प्रतिभा छिपी होती है, जरूरत हमें इसको निखारने की है। इस अवसर पर गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ0 रवि अग्रवाल ने कहा कि वे इप्टा के सभी साथियों का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने उनके विद्यालय के कक्षा 6, 7 एवं 8 के बच्चों के अन्दर छिपे कलाकार को बाहर लाने का कार्य किया। वे इप्टा उरई को आश्वासन देते हैं कि भविष्य में हर तरह से सहयोग को तत्पर रहेंगे।

        
   विभिन्न प्रस्तुतियों में प्रियंका, काजल, रितु, पूजा, ओमेग, रजत, प्रदीप, मोहिनी, रिंकल आदि बच्चों को उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों के लिए प्रमाण-पत्र भी दिये गये। कार्यशाला के समापन कार्यक्रम में गांधी महाविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों सहित नगर के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।