रेडक्रॉस सोसायटी जालौन का निर्वाचन संपन्न

आज दिनांक 2 दिसम्बर 2011 को जनपद जालौन की भारतीय रेडक्रास सोसायटी का त्रिवर्षीय निर्वाचन विकास भवन मीटिंग हॉल में सम्पन्न हुआ। अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सम्पन्न इस निर्वाचन में सर्वसम्मति से उरई शहर के युवा समाजसेवी अभय द्विवेदी को सोसायटी का सचिव चुना गया। इसके साथ ही कोषाध्यक्ष के लिए शिक्षक युद्धवीर कंथरिया को चुना गया। भारतीय रेडक्रास सोसायटी की प्रबन्धकारिणी कमेटी में पदेन सदस्यों-जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, उप-मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक आदि-के अतिरिक्त सचिव, कोषाध्यक्ष तथा पांच सदस्य शामिल होते हैं।


बोलते हुए नवनिर्वाचित सचिव अभय द्विवेदी

उपस्थित सदस्य

सदस्यों में से सचिव और कोषाध्यक्ष के निर्वाचन के बाद पांच सदस्यों का निर्वाचन भी सर्वसम्मति से किया गया। इसमें रामशरण जाटव, रेहान सिद्दीकी, डॉ0 अलका नायक, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर तथा ज्ञानेन्द्र सिंह राजावत को चुना गया। प्रदेश प्रतिनिधि के रूप में अशोक द्विवेदी के नाम पर सभी सदस्यों में सहमति बनी। जनपद की सोसायटी की प्रबन्धकारिणी में पांच सदस्यों का मनोनयन जिलाधिकारी की ओर से किया जाता है। इन पांच नामों की घोषणा बाद में की जायेगी।

सेंटर फॉर द रिसर्च स्टडी ऑफ सोसायटी की नियमित मासिक बैठक का आयोजन

मासिक बैठक == सेंटर फॉर द रिसर्च स्टडी ऑफ सोसायटी (CRSS)

स्थान == उरई (जालौन) दिनांक == 16-10-2011

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दिनांक 16 अक्टूबर 2011 को सेंटर फॉर द रिसर्च स्टडी ऑफ सोसायटी की नियमित मासिक बैठक का आयोजन सुशील नगर स्थित आदर्श एकेडमी में हुआ। ‘अन्ना का आन्दोलन: दिशा एवं दशा विषय पर आयोजित विचार-गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ0 आदित्य कुमार ने अन्ना के आन्दोलन के दोनों चरणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए वर्तमान में अन्ना टीम की कार्यप्रणाली का विस्तार से समझाया। उनका कहना था कि अन्ना टीम के अन्य सदस्य कहीं न कहीं अतिवादिता के शिकार हो रहे हैं, उन्हें इससे बचने की आवश्यकता है। जिस प्रकार से अन्ना टीम के अन्य दूसरे सदस्यों में और अन्ना के बयानों में अब मतभेद की स्थिति बनती दिख रही है वह आन्दोलन की दिशा को भ्रमित करेगी। अन्ना का एक टी0वी0 चैनल को दिये साक्षात्कार में यह कहना कि यदि कांग्रेस जनलोकपाल बिल को पारित करवा देती है तो वे कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करेंगे, कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के विरुद्ध शुरू किये गये एक अच्छे आन्दोलन को कमजोर करेगा।

राजनीतिक एवं चुनाव विश्लेषक डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने हिसार के चुनावों को संदर्भित करके अन्ना आन्दोलन की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण किया। उनका मानना था कि हिसार में कांग्रेस की हार तो पहले से ही तय थी, ऐसे में अन्ना टीम द्वारा वहां पर किसी एक दल के विरोध में राजनीतिक लामबंदी सी करना कहीं न कहीं उनके आन्दोलन पर संदेह सा पैदा करता है। अन्ना टीम को अब इस बारे में विचार करना चाहिए कि अपने 12 दिनों के आन्दोलन के समाप्त होने के बाद से उनकी टीम ने ऐसा कौन सा कार्य किया है जिसके आधार पर पूरे आन्दोलन में जुड़े रहे युवाओं को उसी तीव्रता से जोड़े रखा जाये।

सोसायटी के सचिव राघवेन्द्र द्विवेदी का कहना था कि अन्ना टीम ने खुद को नीयति का निर्धारक मान लिया है जबकि ऐसा नहीं है, नीयति ही नेता का निर्धारण करता है। जिस तरह से अन्ना और उनकी टीम के बयान आ रहे हैं उससे लगने लगा है कि वे लोग कहीं न कहीं कांग्रेस विरोध में कार्य कर रहे हैं न कि जनलोकपाल बिल को लाने के सम्बन्ध में। केजरीवाल, किरन बेदी आदि ऐसे नाम हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान कहीं न कहीं सरकार से, कांग्रेस से परेशान रहे हैं और उसी का आक्रोश वे इस रूप में निकाल रहे हैं।

संजीव कुमार का कहना था कि अन्ना आन्दोलन जिस तेजी से हम सभी के बीच अपनी जगह बनाता दख रहा था उसी तेजी से लग रहा है कि वो अपनी विश्वसनीयता खोने वाला है। बाबा रामदेव की तरह से ही सरकार अन्ना के आन्दोलन को भी कुचलने का रास्ता निकालने की जुगाड़ बना रही है, ऐसे में टीम अन्ना को प्रत्येक कदम फूंक फूंक कर रखने की आवश्यकता है। गोष्ठी के आयोजक जगत सिंह ने कहा कि अन्ना टीम का काम सराहनीय रहा है और चूंकि इस देश को भ्रष्टाचार से लड़ने वाला कोई अगुवा चाहिए था जो अन्ना के रूप में प्राप्त हुआ। इस कारण से सभी लोग बिना किसी भेदभाव के अन्ना के साथ जुड़ गये।

कौशल किशोर ने अन्ना टीम के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वे सारे सदस्य मिलजुल कर काम करेंगे तो ऐसा नहीं है कि सरकार से घबरा जायें। सरकार की मंशा तो हमेशा से ही उनके आन्दोलन को दबाने की रही है और जनता के सहयोग से ऐसा कर पाना सरकार के लिए सम्भव नहीं हो सकेगा। बी0एड0 के छात्र राघवेन्द्र का कहना था कि अन्ना टीम को इस समय भ्रष्टाचार के अलावा किसी और विषय पर बात करके मुद्दे से भटकने का कार्य नहीं करना चाहिए। यदि उनकी टीम के सदस्यों के बयानों में अथवा स्वयं सदस्यों में भटकाव आयेगा तो यह तय है कि इस आन्दोलन को सरकार दबाने से नहीं चूकेगी। इस अवसर पर सभी आये हुए सदस्यों के प्रति आभार सोसायटी के वरिष्ठ सदस्य शिवशंकर ने व्यक्त किया।

सोसायटी की बैठक की अगली तिथि 20 नवम्बर रविवार को निश्चित की गई है, जिसमें एक सर्वेक्षण से सम्बन्धित विषय पर, प्रश्नावली आदि पर चर्चा की जायेगी।

शहीद भगत सिंह को जन्मदिन पर किया गया याद



जनपद जालौन के उरई शहर में आज शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस को शहर के शहीद पार्क में मनाया गया। शहीद पार्क में नगर के गणमान्य नागरिकों ने एकत्र होकर पार्क में स्थापित भगत सिंह के साथ-साथ उनके साथ फाँसी के फंदे को चूमने वाले राजगुरु और अशफाक को भी नमन किया।








वहाँ उपस्थित नागरिकों ने शहीद भगत सिंह के विचारों पर प्रकाश डालकर उन्हें आत्मसात करने पर जोर दिया। इस अवसर पर पार्क में वरिष्ठ राजनीतिज्ञ रामकुमार दीवौलिया, राज पप्पन, रेहान सिद्दीकी, डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, धर्मेन्द्र, संजीव कुमार, धनीराम आदि उपस्थित रहे।



मोमबती में लिया संकल्प भ्रष्टाचार मिटाने का



अन्ना ने दिल्ली में अनशन का मन बनाया और सरकार ने इसे बहुत गम्भीरता से नहीं लिया। अपने अतिशय जोश में सरकार ने दिल्ली पुलिस के द्वारा अन्ना को अनशन पर बैठने से पहले ही उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। अन्ना की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही देश में फैली उनके समर्थकों में और देश से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के प्रति दृढप्रतिज्ञ लोगों में एक अजब लहर सी दौड़ गई। सभी लोग सरकार के इस कृत्य को अहिंसक तरीके से सबक सिखाने के लिए कमर कसकर खड़े हो गये।

समूचा देश अन्ना के स्वर में अपना स्वर मिला रहा था तो उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन का उरई नगर भी किसी से पीछे नहीं दिखना चाहता था। बिना किसी के आवाहन पर, बिना किसी सूचना के उरई की जागरूक जनता स्वप्रेरण से सड़कों पर उतर आई। लोग छोटे-बड़े जत्थों के रूप में, जुलूस के रूप में अन्ना के समर्थन में अपने विचारों को व्यक्त करने लगे। भ्रष्टाचार की मुहिम में जिसे जो स्थान मिला उसने अनशन के लिए वहीं डेरा जमा लिया।

दिन भर के अनशन, जुलूस, पुतला दहन आदि के बाद भी लोगों का जूनून थमने का नाम नहीं ले रहा था। रात के लिए भी कुछ नया करने का विचार किया जा रहा था। इसी बीच मोमबत्ती जुलूस के रूप में एक सुझाव आया और बस उरई की जनता को रात में भी अपना समर्थन अन्ना के प्रति और अपना विरोध सरकारी रवैये के प्रति, भ्रष्टाचार के प्रति दिखाने का मौका मिल गया। 16 अगस्त के दिन सड़कों पर हजारों की संख्या में लोगों ने अपनी हिस्सेदारी करते हुए उरई के जीवित होने का प्रमाण दिया तो शाम 7 बजे निकाला गया मोमबत्ती जुलूस किसी भी रूप में दिन से कम हिस्सेदारी को बयान नहीं कर रहा था।

सैकड़ों की संख्या में उरई के सभी वर्गों, सभी धर्मों के लोग और यहां तक कि राजनैतिक दलों के लोगों ने भी अपनी उपस्थिति को मोमबत्ती जुलूस में दर्ज करवाया। माहिल तालाब पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से आरम्भ होकर जुलूस नगर के मुख्य मार्ग से गुजरता हुआ नगर के मध्य में स्थित गांधी चबूतरा पर रुका और वापस आकर शहीद भगत सिंह पार्क में थमा। बुद्धिजीवी, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर, व्यापारी, किसान, मजदूर, वकील, साहित्यकार, राजनेता, विद्यार्थी, पत्रकार आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति से लग रहा था कि इस बार का आन्दोलन अपने आपमें इतिहास को रचेगा।

इतिहास अपने आपको दोहराने को तैयार बैठा था और उरई नगर का युवा तथा संघर्षशील बुजुर्ग स्वयं को पीछे नहीं रखना चाहता था। ऐसा शायद पहली बार हुआ होगा कि क्रिकेट मैच के बीच भी युवाओं में अन्ना-समर्थन और भ्रष्टाचार-विरोध का मुद्दा छाया रहा। प्रतिदिन तहसील गेट पर, शहीद पार्क में, झलकारी बाई पार्क में, जिला परिषद पर विभिन्न संगठनों द्वारा धरना दिया जाता और प्रतिदिन शाम को 7 बजे से माहिल तालाब से मोमबत्ती जुलूस का संचालन किया जाता। 16 अगस्त को मोमबत्ती जुलूस में शामिल सैकड़ों लोगों की संख्या कम नहीं हुई वरन् प्रतिदिन उसमें किसी न किसी रूप में नये-नये आयाम जुड़ते चले गये। दो दिन के बाद तो नगर के लगभग सभी मोहल्लों में मोबत्ती जुलूस निकाल कर अन्ना की सेहत की दुआ की जाती और भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करने का संकल्प लिया जाता।

मोमबत्ती जुलूस में नगर की विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं, रंगमंचीय संस्थाओं, सामाजिक संस्थाओं ने भले ही अपने-अपने बैनर से अलग-अलग जुलूस निकाला हो पर शाम के 6 बजे के बाद से देर रात 10-11 बजे तक मोमबत्ती जुलूस का निकलना जारी रहा। इन जुलूसों में गूंजते नारों से सम्पूर्ण उरई शहर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता। मोमबत्ती जुलूस की विशेष बात यह रही कि युवा वर्ग की भूमिका इसमें प्रमुखता से उभरकर सामने आई। सम्पूर्ण नगर में ऐसा आभास हो रहा था कि प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी परिवर्तन करने के लिए स्वयं को सकारात्मक, सहज रूप से प्रस्तुत किये हुए है।

अन्ना की आंधी ने सरकार को छोड़कर सभी को अपने साथ ले लिया। प्रतिदिन होते धरने, अनशन और मोमबत्ती जुलूस में नगर की महिलाओं की भागीदारी भी हो रही थी किन्तु 20 अगस्त की शाम 6 बजे नगर की नामचीन महिलाओं ने स्वतन्त्र रूप से मोमबत्ती जुलूस का नेतृत्व और संचाचलन किया। मोमबत्ती जुलूस के लिए कारवां लगातार बढ़ता ही जा रहा था। कभी किसी मोहल्ले के बच्चे सड़कों पर निकल पड़ते तो कभी किसी स्कूल के छोटे विद्यार्थी भी अपने हाथों में मोमबत्ती लेकर रोशनी करने चल देते। जिसकी श्रद्धाभक्ति जिसमें थी वह उसी के सामने जाकर अपनी आस्था को प्रकट करता। कोई गांधी प्रतिमा को अपना स्थल बनाता तो कोई शहीद पार्क में, कोई रानी झांसी चैराहे पर थमता तो किसी को झलकारी बाई पार्क पसंद आता, किसी ने देवी दुर्गा को अपनी श्रद्धा के लिए चुना तो कोई महाबली हनुमान की शरण में आया।

महाविद्यालयों का, विद्यालयों का सहयोग प्रतिदिन प्राप्त हो रहा था और सकारात्मक तथा प्रसन्नता की बात यह थी कि बच्चों के अभिभावक स्वयं ही बच्चों को इसके लिए प्रेरित कर रहे थे। नगर के समस्त महाविद्यालयों के शिक्षकों, विद्यार्थियों द्वारा मोमबत्ती जुलूस में अपनी शिरकत की जा चुकी है। अपने व्यापार की बंदिश को लेकर जो व्यापारी, दुकानदार मोमबत्ती जुलूस में शामिल नहीं हो पाते हैं वे अपनी दुकान के सामने पांच दिये जलाकर बैठ जाते हैं। लग रहा है कि जैसे प्रत्येक व्यक्ति इस रोशनी में भ्रष्टाचार को समाप्त करके ही दम लेना चाहता है। बहुत से व्यक्ति ऐसे भी रहे जो नगर से बाहर कार्य पर जाने के कारण दिन में अनशन में शामिल नहीं हो पाते वे शाम को मोमबत्ती जुलूस के माध्यम से अपनी उपस्थिति को दर्ज करवा देते हैं। कुछ उत्साही नौजवानों ने तो यह भी निर्णय लिया है कि भले ही अन्ना टीम द्वारा प्रस्तावित जनलोकपाल बिल पास हो जाये पर शहीद पार्क में तब तक मोमबत्ती को रोशन करते रहेंगे जब तक कि भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं कर लेते हैं।

नगर के इस उत्साह को देखकर, उसके जुनून को देखकर, यहां के नागरिकों को देखकर आभास हुआ कि यह शहर अभी जिन्दा है, उसे बस एहसास कराये जाने की आवश्यकता है। संख्या बल की दृष्टि से देखें तो प्रतिदिन लगभग एक हजार के आसपास पुरुष, महिलायें, बच्चे मोमबत्ती जलाकर भ्रष्टाचार रूपी अंधियारे को समाप्त करने की मुहिम छेड़े हुए हैं। ऐसे वातावरण को, जुनून को, उत्साह को देखकर आसानी से कहा जा सकता है कि भ्रष्टाचार-मुक्त भारत निर्माण में उरई शहर का भी अप्रियतम योगदान रहेगा, भले ही आज वह आसानी से दुनिया के सामने न आ पा रहा हो।