अन्ना हजारे के समर्थन में उरई (जालौन) में अनशन

अन्ना हजारे के समर्थन में अनशन प्रारंभ
दिनांक - 5 अप्रैल 2011
स्थान -- उरई (जालौन) उ० प्र०
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अन्ना हजारे के अनशन के समर्थन में आज दिनांक- 5 अप्रैल 2011 को उत्तर प्रदेश के जनपद-जालौन के शहर उरई में जिले के नागरिक भी अनशन पर बैठे। उरई के राजमार्ग पर स्थित तहसील कार्यालय के गेट पर विभिन्न व्यवसाय से जुड़े नागरिकों ने इस अनशन में भाग लेकर अन्ना हजारे के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।




पूरी
तरह से नागरिक आन्दोलन तथा गैर-राजनैतिक आन्दोलन के रूप में प्रारम्भ इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार द्वारा लोकपाल बिल का यथाशीघ्र पास करवाने का है। आन्दोलन का उद्देश्य व्यक्तिगत नहीं अपितु देशहित को ध्यान में रखकर निर्धारित किया गया है, इसी कारण से सम्पूर्ण देश के साथ-साथ उरई शहर में भी यह आन्दोलन पूरी शान्ति के साथ, अहिंसात्मक रूप में चलाया जा रहा है।



आज प्रातः 10 बजे से अनशन को प्रारम्भ किया गया। इसमें शामिल होने वालों में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, इंटर कॉलेज के शिक्षक, व्यापारी, राजनेता, अधिवक्ता, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, मीडियाकर्मी, कृषक आदि सम्मिलित हुए। सभी एक स्वर में लोकपाल बिल को पारित करने, भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण की मांग कर रहे थे।


अनशन में डॉ0 राकेश नारायण द्विवेदी, डॉ0 शिवशंकर पटेल, डॉ0 देवेन्द्र नाथ, डॉ0 इन्द्रमणि, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर (सभी गांधी महाविद्यालय, उरई), डॉ0 रामनिवास मानव, डॉ0 रामलखन विश्वकर्मा, डॉ0 के0 सी0 गुप्ता, डॉ0 दुर्गेश कुमार सिंह, डॉ0 रामप्रताप सिंह, डॉ0 रामेन्द्र गुप्ता (सभी दयानन्द वैदिक महाविद्यालय, उरई), डॉ0 जयशंकर तिवारी, (मथुरा प्रसाद महाविद्यालय, कोंच), महेन्द्र विक्रम सिंह, (एडवोकेट), इन्द्रजीत सिंह यादव, (वरिष्ठ अधिवक्ता तथा राजनेता), महेश सर, सुभाष चन्द्रा, (महासचिव, सेवा दृष्टि संस्थान, उरई), अवधेश कुमार दीक्षित, एडवोकेट, मनोज कुमार सचान, अरुण कुमार, शालिगराम निरंजन, गजेन्द्र सिंह गुर्जर, घनश्याम दास शर्मा, अश्वनी बुधौलिया, ज्याति प्रसाद गर्ग, विजय सिंह निरंजन, अहिवरन सिंह यादव आदि सहित जिले के कई गणमान्य नागरिक अनशन स्थल पर उपस्थित रहे।


उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद की प्रदेशीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद् की बैठक
स्थान - उरई (जालौन)
दिनांक - 13 मार्च 2011
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उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद की प्रदेशीय कार्यकारिणी की एक बैठक दिनांक-13 मार्च 2011 को दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई में सम्पन्न हुई।


(बांये से -- डॉ0 कपिल वाजपेयी, डॉ0 राजीव रतन द्विवेदी, डॉ0 आदित्य कुमार)
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बैठक
की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने की। परिषद् के महामंत्री डॉ0 कपिल वाजपेयी, डी0 ए0 वी0 कॉलेज, कानपुर ने बताया कि गत् वर्ष के निर्वाचन के बाद नवीन कार्यकारिणी ने लगभग मृतप्राय पड़े इस संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। इस क्रम में परिषद के पंजीकरण का नवीनीकरण कराया गया है। परिषद की ओर से प्रकाशित होने वाले जर्नल को भी फिर से प्रकाशित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। इस हेतु एक कदम आगे बढ़ाते हुए इसके लिए अनिवार्यतः माना जाने वाला आई0 एस0 एस0 एन0 (ISSN) भी प्राप्त कर लिया गया है। शीघ्र ही यह जर्नल प्रकाशित होकर पाठकों के समक्ष होगा। उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश भर में जहां कहीं भी सेमीनार/गोष्ठियां आदि हो रहे हैं वहां परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री के पहुंचने का प्रयास करते हैं और अभी तक यथासम्भव लगभग सभी स्थानों पर उपस्थित भी हुए हैं।


(बांये से -- डॉ0 कपिल वाजपेयी, डॉ0 राजीव रतन द्विवेदी, डॉ0 आदित्य कुमार)
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अध्यक्ष
डॉ0 आदित्य कुमार ने कहा कि किसी भी संस्था को जीवन्त बनाने के लिए सदस्यों के बीच आपसी संवाद तथा सहयोग आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न अंचलों में परिषद की कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। परिषद एवं उसके सदस्यों के अकादमिक क्रियाकलापों एवं उपलब्धियों को इंटरनेट पर परिषद की बेबसाइट (www.uppolscience.com) तथा ब्लॉग U.P. Political Science Association (http://uppolscience.blogspot.com) के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे परिषद के सदस्यों के साथ-साथ अधिसंख्यक लोगों को परिषद की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त हो सके।


(बांये से-- डॉ0 किशन यादव, डॉ0 शशि पुरवार,
डॉ
0 कपिल वाजपेयी, डॉ0 राजीव रतन द्विवेदी)
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डॉ
0 भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ0 रिपुसूदन सिंह ने परिषद की अब तक की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त किया तथा इसे और अधिक सक्रिय बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


(बांये से-- डॉ0 प्रवीण कुमार, डॉ0 रिपुसूदन सिंह, डॉ0 किशन यादव)
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बैठक
में परिषद के उपाध्यक्ष, डॉ0 प्रवीण कुमार, मेरठ, झांसी से डॉ0 किशन यादव, कालपी से डॉ0 शशि पुरवार तथा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय शिक्षक संघ-बूटा- के अध्यक्ष डॉ0 राजीव रतन द्विवेदी ने भी अपने सम्बोधन के माध्यम से सुझाव व्यक्त किये। इस अवसर पर सुभाष चन्द्रा, राघवेन्द्र द्विवेदी, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर भी उपस्थित रहे। बैठक के अन्त में परिषद के अध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने सभी कार्यकारिणी सदस्यों को स्मृति-भेंट प्रदान की।


(स्मृति भेंट स्वीकारते डॉ0 कपिल वाजपेयी)
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(स्मृति भेंट स्वीकारते डॉ0 प्रवीण कुमार)
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(स्मृति भेंट स्वीकारते डॉ0 राजीव रतन द्विवेदी)
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(स्मृति भेंट स्वीकारतीं डॉ0 शशि पुरवार)
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(स्मृति भेंट स्वीकारते डॉ0 रिपुसूदन सिंह)
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(स्मृति भेंट स्वीकारते डॉ0 किशन यादव)
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डॉ0 आंबेडकर के दर्शन पर राष्ट्रीय सेमिनार कालपी में संपन्न


डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक दर्शन
(सर्व धर्म समभाव के विशेष संदर्भ में)
डॉ0 भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित
तथा
यूजीसी द्वारा राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी
स्थान- कालपी कॉलेज, उत्तर प्रदेश
दिनांक - 01-02 मार्च २०११
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‘‘वर्तमान में भी डॉ0 अम्बेडकर के विचारों की प्रासंगिकता समाप्त नहीं होती है वरन् आज के सामाजिक संदर्भों में उनकी प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। जब तक मानव जाति रहेगी तब तक उनके विचारों का महत्व कम नहीं होगा, यह और बात है कि हम उनके विचारों को आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं।’’ उक्त विचार बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के राजनीतिविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ0 रिपुसूदन सिंह ने कालपी कॉलेज, कालपी के दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये।

डॉ0 रिपुसूदन सिंह
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उत्तर
प्रदेश के कालपी कॉलेज में स्थित डॉ0 भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित तथा यूजीसी द्वारा प्रायोजित ‘डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक दर्शन-सर्व धर्म समभाव के विशेष संदर्भ में’ विषयक सेमिनार को सम्बोधित करते हुए डॉ0 रिपुसूदन सिंह ने कहा कि बाबा साहब ने समाज को दिशा देने का कार्य किया और धर्म आधारित व्यवस्था का विरोध किया।

सेमिनार के उद्घाटन सत्र पर मंचासीन अतिथि
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वेदान्त कॉलेज, लखनऊ से आये डॉ0 ब्रजेश कुमार ने कहा कि किताबी ज्ञान की नहीं आज व्यावहारिक ज्ञान की आवश्यकता है। बाबा साहब ने इसे प्रमाणित भी किया था।

डॉ0 ब्रजेश कुमार
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महाविद्यालय के प्रबन्धक डॉ0 अरुण महरोत्रा ने कहा कि कालपी की पावनता और ऐतिहासिकता को अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था उसी तरह से डॉ0 अम्बेडकर के विचारों का गलत उपयोग भारतीय अंग्रेजों ने किया। उनके मूल्यों और सिद्धान्तों को वर्तमान में राजनैतिक स्वार्थपूर्ति के लिए उपयोग किया जा रहा है।

महाविद्यालय के प्रबंधक -- डॉ0 अरुण महरोत्रा
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प्रथम तकनीकी सत्र पर मंचासीन अतिथि
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प्रथम तकनीकी सत्र में दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनतिविज्ञान विभागाध्यक्ष तथा उ0प्र0 राजनीतिविज्ञान परिषद के अध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहब के सम्पूर्ण चिन्तन को स्वतन्त्रता, समानता और बंधुत्व जैसे तीन शब्दों में समाहित किया जा सकता है। उनको आज इसी रूप में प्रासंगिक भी माना जा सकता है।

उ0प्र0 राजनीतिविज्ञान परिषद के अध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार
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डॉ0 अम्बेडकर विचारधारा के प्रबल प्रचारक डॉ0 रामाधीन ने विचार व्यक्त करते हुए डॉ0 भीमराव अम्बेडकर के सम्पूर्ण जीवन-चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वे मानवीय पक्ष के समर्थक थे और इसी कारण से उन्होंने आरक्षण की दुर्दशा को देखते हुए इसका विरोध भी किया था। आज उन्हीं का समर्थक होने का दावा करने वाले बाबा साहब के विचारों का उपहास उड़ा रहे हैं।

डॉ0 रामाधीन
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सेमिनार में साकेत महाविद्यालय, फैजाबाद के डॉ0 मनोज, उ0प्र0 राजनीति विज्ञान परिषद् के मंत्री डॉ0 कपिल वाजपेयी, डीएवी कानपुर के डॉ0 योगेन्द्र प्रताप सिंह, एम0पी0 कॉलेज कोंच के डॉ0 टी0आर0निरंजन, डॉ0 जयशंकर तिवारी, डी0वी0कॉलेज, उरई के डॉ वीरेन्द्र सिंह यादव, गांधी महाविद्यालय, उरई के डॉ0 राकेश नारायण द्विवेदी, डॉ0 शिवशंकर पटेल, डॉ0 सुमन, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, समाजसेवी सुभाष चन्द्रा सेमिनार में उपस्थित रहे।

संचालन करती डॉ0 शशि पुरवार
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इसके
पूर्व सेमिनार में विषय प्रवर्तन कॉलेज के डॉ0 एम0 सिंह ने किया तथा संचालन डॉ0 शशि पुरवार ने किया। सेमिनार में आये अतिथियों का स्वागत कॉलेज के प्राचार्य डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह ने किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण के द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह
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आभार प्रदर्शन कॉलेज की प्रबन्धकारिणी के सदस्य डॉ0 मैहर जी ने किया।

कॉलेज की प्रबन्धकारिणी के सदस्य डॉ0 मैहर
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अतिथियों का स्वागत
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सेमिनार
में महाविद्यालय के डॉ0 डी0पी0 सिंह, डॉ0 मधुप्रभा, डॉ0 सुधा गुप्ता, डॉ0 कौशल्या, डॉ0 राधारानी, डॉ0 रीता सिंह, डॉ0 संतोष पाण्डेय, डॉ0 विनीत, डॉ0 सोमचन्द्र, डॉ0 पंकज, डॉ0 अमित आदि सहित महाविद्यालय के समस्त कर्मचारी, मीडियाकर्मी, नगर के गणमान्यजन उपस्थित रहे।

राजनीति विज्ञान परिषद्, DVCollege, उरई का वार्षिक समारोह संपन्न



राजनीतिविज्ञान परिषद्, डी0वी0सी0, उरई का भव्य वार्षिक समारोह दिनांक-23.02.2011 को पुस्तकालय सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य स्व0 डॉ0 उदय नारायण शुक्ल स्मृति व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘भारतीय लोकतन्त्र के समक्ष चुनौतियाँ एवं समाधान’ विषय पर परिचर्चा तथा अन्य प्रतियोगितायें सम्पन्न हुईं।

मंचासीन अतिथि
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स्तंभकार के० पी० सिंह
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परिचर्चा का शुभारम्भ करते हुए प्रसिद्ध स्तम्भकार के0 पी0 सिंह ने बताया कि हमारे देश में लोकतन्त्र तो अपना लिया गया किन्तु अधिनायकवादी मानसिकता एक बड़ी चुनौती के रूप में प्रारम्भ से ही रही है। केरल की नम्बूदरीपाद की सरकार को बर्खास्त करने की जो प्रक्रिया केन्द्र के द्वारा शुरू हुई वह आगे भी चलती रही और सरकारिया आयोग की सिफारिशों व सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही इस पर विराम लग सका। हमारा लोकतन्त्र कभी प्रगति की ओर तो कभी भ्रष्टाचार, अवसरवाद व निरंकुशता के चक्र में घिरा दिखता है। भ्रष्टाचार ने लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण, दलित चेतना तथा सामाजिक न्याय जैसी अवधारणाओं को अर्थहीन व मजाक का पात्र बना दिया।

बुन्देलखण्ड संग्रहालय के निदेशक डॉ0 हरीमोहन पुरवार
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मुख्य वक्ता तथा बुन्देलखण्ड संग्रहालय के निदेशक डॉ0 हरीमोहन पुरवार ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि जनता की, जनता द्वारा, जनता के लिए सरकार का लोकतान्त्रिक विचार अपना अर्थ खो बैठा है। अब सरकार जनता की उपेक्षा उससे दूरी और उसे प्रलोभन देने वाली बन गई है।

विभागाध्यक्ष आदित्य कुमार
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विभागाध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में प्रगति व अवरोध साथ-साथ चलते हैं। लोकतन्त्र भी इसका अपवाद नहीं है पर लोकतन्त्र एक स्वयं सुधारक संस्था व्यवस्था है। जागरूकता और लोक-शिक्षण से चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

प्राचार्य डॉ0 अनिल कुमार श्रीवास्तव
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समारोह के अध्यक्ष एवं प्राचार्य डॉ0 अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि व्यक्ति ही समाज के निर्माण की इकाई है अगर हम में से प्रत्येक अपना सुधार कर ले तो समाज व तन्त्र सभी सुधर जायेगा।

इससे पूर्व छात्राओं द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की गई। विभागाध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया तथा संयोजक डॉ0 नगमा खानम ने परिषद् की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी।

वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करतीं नगमा
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सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करते सुभाष चंद्रा
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परिषद्
द्वारा ‘महिला जागरूकता और समाज में उनकी स्थिति’ तथा ‘राजनैतिक जागरूकता एवं व्यवहार’ विषयों पर कराये गये सर्वेक्षणों की विश्लेषण रिपोर्ट सुभाष चन्द्रा तथा रणविजय ने प्रस्तुत की।

इस अवसर पर परिषद् द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किये गये। जिनके निर्णायक डॉ० आनन्द खरे, डॉ0 वीरेन्द्र सिंह यादव, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर थे।

परिणाम निम्नवत रहे-
निबन्ध प्रतियोगिता---
प्रथम-शीला देवी, आकांक्षा सक्सेना
द्वितीय-आनन्द रंजन, नीतू सिंह
तृतीय-सुमन वर्मा, अनीता चैधरी, देवेन्द्र कुमार, वर्षा तिवारी

संविधान ज्ञान प्रतियोगिता---
प्रथम-अर्चना राठौर
द्वितीय-देवेन्द्र कुमार
तृतीय-अनीता, शाहीन अख्तर
सांत्वना-पूजा जैन

तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता---
प्रथम-दिव्या निगम
द्वितीय-पुनीत
तृतीय-निखिल शर्मा





विजयी छात्र-छात्राओं को तथा सर्वेक्षण में सहभागी रहे छात्र-छात्राओं को अतिथियों के द्वारा पुरस्कार प्रदान किये गये। समारोह का संचालन डॉ0 नगमा खानम तथा डॉ0 राममुरारी चिरवारिया ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में डॉ0 अरुण कुमार निगम, डॉ0 अभयकरन सक्सेना, डॉ0 सत् चित् आनन्द, डॉ0 एम0वी0 चतुर्वेदी, डॉ0 शारदा अग्रवाल, डॉ0 नीता गुप्ता, डॉ0 अनुज भदौरिया, डॉ0 राजेश पाण्डेय, डॉ0 रामाधीन, डॉ0 नीलरतन सिंह, डॉ0 राजवीर सिंह, डॉ0 के0 के0 निगम, प्रो0 योगेन्द्र बेचैन, डॉ0 ए0 के0 मिश्रा आदि सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

वातायन के संस्थापक एवं स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का निधन

वातायन के संस्थापक एवं स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का निधन

शहर के दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व प्राध्यापक एवं साहित्यिक पत्रिका स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का मंगलवार को प्रातः निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। डॉ0 ब्रजेश कुमार की शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई और अध्ययन पूर्ण करने के बाद उन्होंने उरई को अपनी कर्मस्थली के रूप में चयनित किया और महाविद्यालय को दो दशक से अधिक समय तक अपनी सेवायें प्रदान की।

उत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभा के धनी डॉ0 ब्रजेश का रंगमंच के प्रति भी जबरदस्त लगाव था। उन्होंने उरई जैसे छोटे से शहर में आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व जबकि शहर में रंगमंचीय कार्यक्रमों के प्रति लोगों की विशेष रुचि नहीं थी, तब उन्होंने थैंक्यू मिस्टर ग्लॉड, लहरों के राजहंस, घासीराम कोतवाल जैसे विश्वप्रसिद्ध नाटकों का मंचन करवाया। इसके साथ ही उन्होंने नाटकों को प्रादेशिक स्तर पर भी निदेर्शित करके उरई को रंगमंच के क्षेत्र में विशेष पहचान दी। रंगमंच और सांस्कृतिक कार्यों के प्रति विशेष रुचि रखने के कारण ही उन्होंने 25 वर्ष पूर्व सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय संस्था ‘वातायन’ की स्थापना कर शहर में सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण किया जो आज भी निरन्तर इस ओर प्रगति कर रही है।

रंगमंच के प्रति स्नेह और साहित्य- लेखन के प्रति अनुराग रखने के कारण उन्होंने कई नाटकों तथा कविताओं की सर्जना की। ओरछा की नगरबधू, लाला हरदौल आदि जैसे स्थानीय विषयों के द्वारा उन्होंने बुन्देली संस्कृति को भी जनता के सामने रखा। साहित्य अनुराग के कारण ही वे सेवानिवृत्ति के बाद भी साहित्य से जुड़े रहे। इसी अनुराग के कारण डॉ0 ब्रजेश कुमार ने वर्ष 2005 में उरई से चौमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘स्पंदन’ का प्रकाशन भी शुरू किया। उनके प्रधान सम्पादकत्व में निकलने वाली स्पंदन ने अपने अल्प समय में ही काफी प्रसिद्धि प्राप्त की और देश-विदेश में नाम कमाया।

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वे काफी समय तक उरई शहर में ही रहे और फिर अपनी आयु और शारीरिक अस्वस्थता के कारण वे अपने इकलौते पुत्र अभिनव उन्मेश कुमार के साथ रहने लगे। अन्तिम समय तक वे किसी न किसी रूप से स्वयं को सक्रिय बनाये रखे रहे। वे अपने पीछे अपनी पत्नी, पुत्री-दामाद, पुत्र-पुत्रबधू, नाती-नातिनों को छोड़ गये।

यह और बात है कि अपनी शारीरिक अस्वस्थता के कारण डॉ0 ब्रजेश कुमार अन्तिम समय में रंगमंच और साहित्य से पूर्ण रूप से नहीं जुड़े रह सके किन्तु यह सत्य है कि उनका जाना रंगमंच के क्षेत्र में, साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है। इस क्षति को लम्बे समय तक भरा जा पाना सम्भव नहीं है। उन्होंने उरई जैसे छोटे नगर को रंगमंच के प्रति, साहित्य के प्रति जागरूक किया और यहां के लोगों में इनके प्रति लगाव भी पैदा किया। उनके निधन पर डॉ0 आदित्य कुमार, डॉ0 अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ0 अभयकरन सक्सेना, डॉ0 वीणा श्रीवास्तव, डॉ0 एस0के0श्रीवास्तव, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, डॉ0 लखनलाल पाल, सुभाष चन्द्रा, रामजी सक्सेना, अश्विनी कुमार गुप्ता, डॉ0 राजेश पालीवाल, डॉ0 हर्षेन्द्र सिंह सेंगर, डॉ0 रवि गर्ग, डॉ0 तारेश भाटिया, डॉ0 राजेन्द्र निगम, डॉ0 डी0 के0 सिंह, डॉ0 ए0के0 निगम, डॉ0 के0 के0 निगम, डॉ0 महेश अरोरा, सुरेन्द्र सिंह कुशवाह, राजपप्पन, डॉ0 स्वातिराज आदि सहित महाविद्यालय परिवार ने तथा जिले के गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी शोक-संवेदनाएं व्यक्त की हैं।